कुछ समय पहले तक आम आदमी के पास अपनी साइकिल होना एक बहुत बड़ी बात हुआ करती थी। जो लोग यहां-वहॉ आने-जाने के लिए ज्यादतर साइकिल का ही इस्तेमाल करते थे वे शारीरिक रूप से स्वस्थ हुआ करते थे। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी स्वस्थ रहने तथा रोग मुक्ति के लिए साइकिल चलाने को श्रेष्ठ मानते है, बाद में यह स्वास्थ्यवर्धक व्यायाम भी मान लिया गया । पहले हवा में किसी प्रकार की जहरीली गैसें या धुंऑ या तो नहीं होता था या बहुत कम मात्रा में पाया जाता था।
जैसे-जैसे समय आगे बढा वैसे - वैसे गैस-डीजल से चलने वाले वाहन भी सडको पर दिखाई देने लगे। हर दिन के साथ इनकी संख्या बढ़ती चली गई। इनके कारण व्यक्ति की साइकिल भी पीछे छूट गई और हवा में प्रदूषण व्याप्त होने लगा । व्यक्ति थोड़ी दूर जाने के लिए भी दो पहिये या चार पहिया वाहनों का प्रयोग करने लगा। परिणामस्वरूप व्यक्ति शारीरिक तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में घिरता चला गया । इन रोगों के उपचार में साइकिल चालन को भी शामिल किया गया । इस दृष्टि से देखें तो स्पष्ट हो जाएगा कि साइकिल चलाना वास्तव में ही अत्यंत लाभदायक है ।

आज साइकिल चालन को एक चिकित्सा पद्धति के रूप में पूरे विश्व में स्वीकार किया जाने लगा है । अनेक रोगों के उपचार के लिए साइकिल चलाने का परामर्श दिया जाता है । अनेक पीड़ित व्यक्तियों को इससे आशा से कहीं अधिक लाभ की प्राप्ति हुई है । यह एक अत्यंत ही सरल चिकित्सा पद्धति हैं जिसके अंतर्गत नियमित साइकिल चलाकर कई रोगों से मुक्ति मिलती हैं एवं शरीर स्वस्थ रहता है । इस विधि में रोजाना 4 से 5 किलोमीटर साइकिल चलाना पड़ती है । यदि साइकिल सड़क पर ना चलाई जा सके तो उसे स्टैंड पर खड़ा करके लगभग 30 मिनट तक पैडल मारने से भी वही लाभ होता है।
इस दृष्टि से देखें तो स्पष्ट हो जाएगा कि साइकिल चलाना वास्तव में अत्यंत लाभदायक है।
साइकिल चलाने का लाभ-
1- साइकिल चलाने से पैर की विशिष्ट कसरत होती हैं जिसके परिणामस्वरूप वह मजबूत होती हैं ऐसा करने से मांसपेशियां सुदृण एवं सक्रिय हो जाती हैं।
2- साइकिल चलाने के परिणामस्वरूप शरीर में रक्त संचार तीव्र हो जाता है जिसके कारण शारीरिक ऊर्जा में वृद्धि होती हैं है और साइकिल चालक चुस्त बना रहता है।
3- साइकिल चालन के परिणाम स्वरूप आमाशय की मांसपेशियों की विशिष्ट कसरत होती है , जिसके कारण पेट बाहर नहीं निकलता है। जिन की तोंद बाहर निकलने की शिकायत रहती है, साइकिल चलाने से वह समस्या दूर हो जाती हैं
4- साथ ही जिन लोगों की तोंद निकली हो उन्हें साइकिल चलाते समय ज्यादा सांस न फूले, इसका ध्यान रखना चाहिए।
5- नियमित रूप से कुछ समय साइकिल चलाने से मोटापे की समस्या से बचा जा सकता है।
6- साइकिल चलाने वाला आसानी से डायबिटीज का शिकार नहीं होता है ।
7- साइकिल चलाने से व्यक्ति के पैरों के तलवों में उपस्थित विभिन्न बिंदुओं पर भी दबाव लगता है जिससे जाने -अनजाने शरीर की कई व्याधियॉ स्वतः ही ठीक हो जाती है ।
साइकिल चालन के विशेष लाभ-
वर्तमान में घरों में मिलने वाली साइकिल भी बाज़ार में उपलब्ध है ,जिसे घर में रखकर भी इस चिकित्सा विधि का लाभ लिया जा सकता है। घरेलू महिलाओं को भी इससे लाभ मिल सकता है । आज जो लोग पूरी तरह से संपन्न है किंतु, कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं से ग्रस्त है ,विशेष रूप से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ,उन्हें साइकिल चलाने का अभ्यास अवश्य करना चाहिए । साइकिल कहां और कितने देर चलानी है, कैसे चलानी है इसका निर्धारण स्वयं करें लेकिन चलाने से पूर्व योग्य चिकित्सक से एक बार इस बारे में परामर्श अवश्य ले लें ।
इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि साइकिल चलाने के समय कमर बिल्कुल सीधी होनी चाहिए क्योंकि वर्तमान में ऐसी साइकिल देखने और बिकने में आने लगी हैं जिन्हें चलाते समय चालक आगे की ओर झुका रहता है इससे पीठ संबंधित समस्याएं उत्पन्न होने की संभावनाएं बनी रहती हैं ।
इस प्रकार हम देखते हैं कि साइकिल चलाने से आपके ह्रदय ,रक्त वाहिकाओं और फेफड़ों की कसरत होती है। साइकिल चलाने के दौरान व्यक्ति गहरी सांस लेता है, जिस से पसीना निकलता है और शरीर के तापमान में वृद्धि का अनुभव करता है । जिससे पूरे शरीर के फिटनेस स्तर में सुधार होता है । नियमित रूप से रोजाना करीब 30 मिनट तक एक लय में साइकिल चलाने से शरीर व मस्तिष्क के फिटनेस लेवल में आश्चर्यजनक वृद्धि होती है।

ये लोग साइकिल ना चलाएं
जिन लोगों के घुटने में दर्द हो,
जो अस्थमा से पीड़ित हो , चलाएं लेकिन चिकित्सक की देखरेख में एवं सलाह लेकर क्योंकि अस्थमा में नियमित रूप से साइकिल चलाकर इससे लाभ भी लिया जा सकता है।और वे लोग भी जिन्हें मिर्गी का दौरा पड़ता है ।
3 जून को विश्व भर में यह दिन साइकिल दिवस के रूप में मनाया जाता है । जो व्यक्ति स्वास्थ्य के लिहाज से साइकिल चलाना बेहतर समझता है वह डायबिटीज के खतरों से भी बचा रहता तथा शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रख सकता है ।
आओ हम मिलकर यह संकल्प ले की ग्राम एवं शहर की प्राकृतिक सुंदरता एवं पर्यावरण को बचाने के लिए सप्ताह में तीन दिवस ही साइकिल चलाकर इसकी शुरुआत करें, ताकि वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को होने वाले नुकसान को वर्तमान में कुछ हद तक धीरे-धीरे कम किया जा सके और आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ एवं प्रदूषण रहित भविष्य दे सके।
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