Importance of exercise and phisycal work.


प्रकृति ने मानव शरीर का निर्माण कुछ इस तरह किया है कि उसे जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत श्रम करने की आवश्यकता है । परंतु व्यक्ति जैसे-जैसे आयु को प्राप्त करता है, वह इसे भूलता जाता है और श्रम करना बंद कर देता है और फिर धीरे-धीरे विभिन्न रोगों से ग्रस्त होकर अकाल मृत्यु को प्राप्त हो जाता है ।

 Health के मान से जो लोग सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने को मानसिक एवं शारीरिक रूप से सक्रिय रखते हैं वह अपना जीवन निरोगी रूप से जीते हैं और साथ ही दीर्घायु को भी प्राप्त होते हैं । यजुर्वेद में भी कहा गया है कि अच्छे व सत्कर्म करते हुए 100 वर्ष तक जीवित रहा जा सकता है ।

 आयुर्वेद शास्त्रों में भी कहा गया है कि जीवन की उस अवस्था में जब हम काम से निवृत हो जाते हैं या अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हो जाते हैं तब किसी ना किसी आनंददायक और मन को प्रफुल्लित करने वाले काम में लग कर अपने दिमाग व शरीर दोनों को ही सक्रिय कर एक healthy व सार्थक जीवन जिया जा सकता है l
 निष्क्रिय जीवन जीने से या यूं कहें कि आलस्य पूर्ण जीवन से शरीर व मस्तिष्क का तीव्रता से ह्रास होकर व्यक्ति  मृत्यु की ओर चला जाता है। श्रम ही व्यक्ति को चैतन्य और जीवित रखता हैl यदि व्यक्ति हमेशा शारीरिक और मानसिक रूप से सक्रिय रहता है तो वह चैतन्य और healthy होकर जीवन आनंद उठा सकता है।
  भोजन हमें शक्ति  प्रदान  करता है  ना कि कोई व्याधि या बीमारी । कहा भी गया है कि श्रम तो आहार से भी अधिक पवित्र हैं ,क्योंकि आयुर्वेद में कहा गया है कि जो भोजन किया है उसे पचाना भी अनिवार्य है।हमारी पाचन क्रिया श्रम के द्वारा ही सुचारू रूप से काम करती है और व्यक्ति श्रम के बिना पौष्टिक I 
 भोजन से भी शरीर को कोई लाभ नहीं मिलता है बल्कि विकार ही पैदा होते हैं । विशेष बात यह है कि श्रम से हमारी पाचन शक्ति बहुत ही सुदृढ़ होती हैं।

व्यायाम व श्रम से पाचन शक्ति मजबूत होती है, पेट की आंते  ठीक तरह से काम करती हैं ,रात को नींद अच्छी आती है ,मोटापा नहीं होता है,रक्त संचार ठीक तरह से काम करता है तथा शरीर निरोगी होकर शक्तिशाली होता है व कोई भी बीमारी आप पर अचानक हमला नहीं कर सकती है। 
शारीरिक श्रम से मनुष्य के शरीर से जो भी पसीना निकलता है उसके कारण शरीर के मल धूल जाते हैं और अच्छी भूख लगती हैं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि श्रम से 527 मांसपेशियां मजबूत और सशक्त होकर शरीर को बलशाली बनाती हैं । शारीरिक श्रम और व्यायाम से स्नायु वह मांसपेशियां मजबूत होती हैं। शरीर आचार्य ने भी कहा है कि गतिशीलता ही जीवन है और आलस्य ही मृत्यु है ।
  Health के लिए सक्रिय जीवन ही सबसे श्रेष्ठ जीवन -
 श्रम और सक्रियता से ही भोजन शरीर के लिए लाभकारी होता है । हमारी बीमारियां उचित भोजन व उचित व्यायाम व श्रम से ही ठीक होकर बीमारी को पास नहीं आने देती हैं व एक healthy जीवन जिया जा सकता है ।

 श्रम के साथ ही यदि व्यायाम ,आसन और प्राणायाम भी किया जाए तो शरीर स्वस्थ रहता है ।  आदि काल में मानव अपना हर कार्य स्वयं करता था और प्रकृति के संपर्क में रहता था जिसके कारण वह निरोगी था क्योंकि वह श्रम करने से दूर नहीं रहता था। शरीर व मन का लगातार एक साथ एकाकार कर उपयोग करने से शरीर व मन सशक्त बना रहता है ।

 आधुनिक काल में मनुष्य मेहनत के अभाव में अनेक प्रकार के रोगों से घिरता जा रहा है व दवाइयों का सेवन करके ही स्वस्थ रहना चाह रहा है, जबकि व्यक्ति अपनी शक्ति अनुसार मेहनत करें तो दवाइयों के बिना ही एक स्वस्थ व healthy जीवन जी सकता है ।
Health  के लिए व्यायाम क्यों जरूरी है -
व्यायाम से हमारी पाचन प्रणाली मजबूत होती हैं।  यदि कठोर परिश्रम करेंगे तो बुढ़ापे से बचा जा सकता है । श्रम के अभाव के कारण ही हमें आज असमय ही कई बीमारियां घेर लेती हैं।
  श्रम व व्यायाम से उर्जा मिलती हैं व सहनशक्ति में भी वृद्धि होती हैं। उचित व्यायाम से मधुमेह एवं रक्तचाप में कमी होती हैं व ह्रदय को बल मिलता है । अगर हम रोजाना थोड़ा-सा व्यायाम व उचित श्रम करेंगे तो इसका प्रभाव शरीर पर शीघ्र होता है । हमारी भुजाएं व पैरों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर का रक्त संचार सुचारू रूप से होने लगता है।
  (Healthy )निष्कर्ष-
इस प्रकार हम देखते हैं कि शारीरिक श्रम व व्यायाम शरीर के लिए किस प्रकार लाभदायक  हैं ,यह हमने देखा यदि हमें डॉक्टर से दूर रहना है व एक स्वस्थ जीवन जीना है तो व्यायाम व शारीरिक श्रम महत्वपूर्ण है । आज के विलासितापूर्ण और अति आरामदायक जीवन की बुराइयों से दूर रहना है तो व्यायाम अति आवश्यक है और यही एक  healthy जीवन के लिए आवश्यक है ।

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