जय सियाराम
सोते -जागते, रोते -हंसते अनायास ही हमारे मन- मस्तिष्क, हृदय एवं सांसों में एक ही आवाज आती है और वह है राम ।
इस धरती पर त्याग और संयम, वीरता, धैर्य, साहस की मूर्ति है तो वह है राम ।अनुशासन और संयम का पर्याय है तो वह है राम, मां का दुलारा है, पिता का आज्ञाकारी, भाई का सखा, पत्नी का विश्वास है तो वह है राम। शत्रु भी जिसे नमन करते हैं वह है राम। विश्व विधाता ने भी जिन्हें दुलार दिया है वह है राम । त्याग का पर्याय है राम, शक्ति और धीरता का दूसरा नाम है राम। मानव मुख से अगर सबसे अधिक उच्चारित होने वाला शब्द है तो वह है राम।
वर्तमान में हमारे जीवन में एक एक शुभ अवसर प्राप्त हुआ था दिनांक 22 जनवरी 20 24 को घर-घर में राम दीपक प्रज्वलित कर सभी को एक होने का अवसर प्रभु श्री राम ने हमें प्रदान किया था ।भारत की धरा के साथ ही पूरे विश्व को राम मय बना दिया।
राम से ही मानवता जीवित है वरना इस पृथ्वी पर राक्षसों की कमी न तो पहले थी और ना अब है ,लेकिन राम की धरा पर शत्रुओं का विध्वंस होने में अधिक समय नहीं लगता है। राम से ही पृथ्वी सुंदर है अर्थात जीवन है, खुशहाली है त्याग है, संयम है, मित्रता है, राम वैर को मिटाने वाले हैं। राम छोटे- बड़े का भी भेद दूर करने वाले हैं ,कमजोर और वंचितों को भी उनका साथ देकर सबल बनाने वाले हैं। राम विश्व में लोकतंत्र की की स्थापना करने वाले प्रथम राजा है ,अर्थात रामराज से बड़ा कोई लोकतंत्र नहीं हो सकता ऐसे हैं हमारे राम। यह संसार और हमारा जीवन बिना राम के वीरान है, क्योंकि राम युद्ध में भी शांति का संदेश देते हैं ,त्याग में भी पवित्रता प्रदान करते हैं ,राम है तो भारत है ।राम के बिना हमारी सांसों का स्पंदन असंभव है। हमारे जीवन का आधार है राम ।
आजादी के बाद कुछ इस प्रकार का माहौल बन गय बनाया गया कि देशवासियों को राम का नाम लेने से भी डराया जाता था ,और आश्चर्य तब होता है जब राम का नाम लेने में भी पक्षपात किया जाता था। इसलिए ऐसे प्रधान को कोटि-कोटि वंदन जिसने हमें राम की भूमि पर जन्म लेने में गर्व का अनुभव कराया । हम भाग्यशाली हैं कि हमने राम की धरती पर जन्म लिया है । बोलो जय सियाराम ।
भारत की भूमि पर राम का उत्सव निरंतर मनाया जा रहा है। पहले राम की धरती पर ही राम और राम भक्तों में भेदभाव किया जाता था ,बल्कि भयभीत भी किया जाता था।
राम की पहचान केवल सनातन धर्म से ही नहीं है बल्कि त्याग, भाईचारा ,विश्वास और अन्याय की विरूद्ध न्याय की लड़ाई हेतु बल्कि उन जंगल वासियों की भी आवाज बने राम जिनकी कोई पहचान नहीं थी उनकी पहचान बने राम। राम ने उन पीड़ित वंचितों को साथ में लेकर रामराज्य की स्थापना की ।आज विश्व बंधुत्व की भावना और राम राज्य पुष्पित और पल्लवित हो रहा है।
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